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क्या दिल्ली वालों ने अरविन्द को एक और मौका देने की ठानी, राष्ट्रवाद का मुद्दा क्यों होने जा रहा है गौण ?
February 8, 2020 • Geeta Bisht & Dr. Naresh Kumar Choubey • political

 

डॉ. नरेष कुमार चौबे नई दिल्ली।  दिल्ली के नेताओं का भाग्य मतपेटियों में बन्द हो चुका है। 11 फरवरी को उदय होगा। दिल्ली में टोटल 58 प्रतिषत वोटिंग हुई है। जो लोग कह रहे थे कि अपने कागज नहीं दिखायेंगे, उन क्षेत्रों में कुछ अधिक ही वोटिंग हुई है। ऐसा लगता है कि दिल्ली में मुस्लिम वोटर अपनी ताकत दिखा रहे हैं जबकि हिन्दू वोटर बंटा हुआ है। 
मुुझे एक मुस्लिम बादषाह की कहानी याद आती है। दिन का युद्ध होने के बाद दोनों पक्षों की सेनाएं विश्राम पर थीं अपने -अपने तम्बू में आराम और खाना बनाने में मषगूल थीं। तभी मुस्लिम बादषाह की निगाहें हिन्दू राजा के तम्बूओं की ओर पड़ी, जहां धुआं उठ रहा था, बादषाह ने अपने वजीर को बुलाया और पूछा कि क्या हिन्दू राजाओं के तम्बुओं में आग लग गई है, जिस पर वजीर ने जो जबाव दिया वो गौर करने लायक है, उसने कहा कि बादषाह सलामत ये लोग जातियों में बंटे हुये हैं। ब्राहमण अलग चूल्हे बनाये हुये है तो क्षत्रिय अपने और अन्य जातियां अपने। इनके चूल्हे अलग-अलग हैं क्योंकि ये आपस में ही अलग-अलग है। बादषाह सलामत के चेहरे पर मुस्कान आयी और उन्होंने कहा कि हम जंग जीत रहे हैं। 
आज भी कामोबेष यही स्थिति है कि हम केवल अपना विकास देखना चाहते हैं देष जाये भाड़ में !
कांग्रेस पार्टी ने जमकर ‘‘आप’’ को वॉक ओवर दिया, जिसकी वजह यह रही कि भाजपा के तमाम प्रयास के बावजूद भी भाजपा दिल्ली की जनता को राष्ट्रवाद नहीं पढ़ा पाई। दिल्ली की जनता मुफ्त की भेंटों में फंसी हुई है। यही वजह है कि 2020 में भी केजरीवाल जैसा व्यक्ति सरकार बनाने जा रहा है। मैंने पहले भी लिखा था कि क्या भाजपा भी चाहती है कि केजरीवाल दिल्ली में ही उलझा रहे। तभी तो भाजपा ने भी कुछ सीटों पर वॉक ओवर के रूप में ‘‘आप’’ के सामने कमजोर उम्मीदवार खड़ा किया है। दिल्ली चुनाव में कांग्रेस तो कहीं थी ही नहीं। हॉ कांग्रेस के कुछ उम्मीदवार जो कि अपने दम पर चुनाव लड़ रहे हैं वो जरूर अपना वजूद जिन्दा रखना चाहते हैं। वो पार्टी के चुनाव चिन्ह पर जरूर लड़ रहे हैं लेकिन क्षेत्र में उनका वर्चस्व और उनका अपना भी कद है। यही वजह है कि वो जीत के करीब हैं। चाहे वो लिलौठिया हो या देवेन्द्र यादव।
दिल्ली में तकरीबन 58 प्रतिषत वोटिंग हुई है। दिल्ली में जो मुस्लिम बहुल विधान सभा क्षेत्र हैं उनमें 60 प्रतिषत से अधिक वोटिंग हुई है। जो अपने कागज नहीं दिखाना चाहते थे वो आज पोंलिंग अधिकारी के सामने सब कुछ लेकर पहुंचे थे।
क्या दिल्ली की हवा देष को दिषा नहीं दिखाने जा रही। आज षाहीन बाग है तो कल अमरोहा, अलीगढ़, मेरठ, कायमगंज, फर्रूखाबाद और अन्य मुस्लिम इलाके नहीं होंगे। हमें विचार करना होगा।