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क्या देश में वामपंथी विचारधारा हावी होने का प्रयास कर रही है?
January 10, 2020 • Geeta Bisht & Dr. Naresh Kumar Choubey • social

पिछले कुछ वर्षों से या यों कहिये कि जबसे भाजपा सत्ता में आई है, कांग्रेस साफ हुई है, वामपंथियों में घबराहट भरा माहौल बन गया है। उनहें एहसास होने लगा है कि कहीं भारत की धरती पर वामपंथी विचारों दाह-संस्कार ही न हो जाये। जैसा कि सर्वविदित है कि वामपंथियों ने देश के सभी राज्यों में वामपंथी विचारधारा का प्रचार-प्रसार करने का पुरजोर प्रयास किया। लेकिन जो राज्य थोड़े पिछड़े और अशिक्षित थे वहां ही ये जड़ें जमाने में कामयाब रहें देश के युवाओं को पाश्चात्य संस्कृति का आकर्षण, खुले विचारों के नाम पर परोसा । धर्म संस्कृति को आडम्बर बताकर भारत के युवाओं को दिग्भ्रमित किया। अलगाववादी नीति, नक्सलवादी नीतियां ही इनकी नियति बनी हुई है। केरल, बंगाल, झारखण्ड, आसाम जैसे राज्यों में ये जड़ें जमाने में काफी हद तक कामयाब भी रहे। इनकी नक्सलवादी नीतियों से छततीसगढ़ जैसे राज्य भी अछूते नहीं रहें लेकिन भाजपा के सत्ता में आते ही इनकी नीतियों पर कुठाराघात होने लगा हैं देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी सुरक्षित हाथों में दिखाई दे रही है। यही वजह है कि इन्होंने अपनी हार और अपना खात्मा देखते हुए खुलकर सड़कों पर उतरने का मन बना लिया हैं । यही वजह है कि एन.आर.सी और सिटिजन एमेंडमेंट बिल का विरोध करने के नाम पर देश के मुस्लिम वर्ग को गुमराह कर आन्दोलित कर दिया है। शिक्षा के पवित्र संस्थानों को राजनीति और आन्दोलन का अखाड़ा बना कर रख दिया हैं। गौरतलब है कि पिछले दशक में मोदीनीत भाजपा सरकार ने बड़ी ही हिम्मत वाले फैसले लिये हैं। धारा 370, 35 ए जैसे महत्वपूर्ण फैसले ले लेना कोइ आसान काम नहीं था। देश का सिरमौर जैसे 370 और 35 ए के कारण अलग कटा हुआ था। कोई भी पूर्ववर्ती सरकार जम्मू-काश्मीर के मामले में हाथ डालते हुए डरती थीं। चाईना बौर्डर पर हमारे सैनिक हमेशा घबराये रहते थे। डोकलाम जैसे गम्भीर मुद्दे पर सरकार अडिग रही। जो पाकिस्तान हमेशा नाक में दम किये रहता था, वो आज दुम दबाये चुपचाप पड़ा है। राम मंदिर मुद्दा कितना सहज निबट गया। नोटबंदी जैसे कठोर कदम उठाना बड़ा ही हिम्मत भरा कदम थां पूरा विश्व आश्चर्यचकित देख रहा है कि कैसे मोदी सरकार ने बिना किसी हलचल के बिना किसी को नुकसान पहुंचाये इतने बड़े कदम सफलता पूर्वक उठा लिये। यही वजह है कि कुछ लोगों को मोदी सरकार की ये सफलताएं हजम नहीं हो पा रही। ये सब जानते हैं कि सीएए और एन आर सी देश के किसी भी नागरिक के लिए गलत नहीं हैलेकिन मोदी सरकार की सफलताओं को हजम ना कर पाने वाले विपक्षी किसी न किसी बहाने देश में गृहयुद्ध की स्थिति बनाने पर आमादा हैं। आपको बताते चलें कि देश में 30 करोड़ शिक्षार्थी हैं लेकिन मात्र 50 हजार से एक लाख शिक्षार्थी ही एन आर सी और सीएए का विरोध कर रहे हैं। क्या कभी इस पर विचार किया कि ये आन्दोलनरत लोग कौन हैं। ये जो विरोध के स्वर उभर रहे हैं इन्हें कौन हवा दे रहा है। दिल्ली जैसे राज्य में देश का सबसे संभ्रान्त कहा जाने वाला जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय इस आन्दोलन का केन्द्र बनाया जा रहा है। दिल्ली में नोर्थ कैम्पस भी है, वहां क्यों नहीं विरोध के स्वर उभर रहे। दिल्ली ही नहीं देश में जामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अलावा और विद्यालय नहीं हैं क्या? क्या इन्हीं विद्यालय के शिक्षार्थियों की नागरिकता खतरे में पड़ी हुई है। या फिर देश को टूटने से बचाने की जिम्मेदारी इन्हीं दो विविद्यालय पर है

एन आर सी और सी ए ए को लेकर एक ओर जहां देशभर में इस कानून का स्वागत किया गया। वहीं कुछ चन्द लोग देश की शान्ति भंग करने का प्रयास कर रहे हैं । मैं आज दिल्ली के जामिया विश्वविद्यालय के सामने से निकल रहा था, जहां विद्यालय के छात्र-छात्राओं के अलावा सैंकड़ों की संख्या में स्थानीय मुस्लिम नागरिक ही नजर आ रहे थे। ऐसा लग ही नहीं रहा था कि कोई छात्र आन्दोलन है। ये ठीक है कि आन्दोलन शान्तिपूर्ण चल रहा है, लेकिन इसका सबसे बड़ा कारण उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का साहसिक निर्णय है। अगर सरकारी प्रापर्टी का नुकसान करोगे तो तुमसे ही वसूलेंगे। यही डर आन्दोलनकारियों को शान्तिपूण आन्दोलन करने पर मजबूर कर रहा है। आपको बताते चलें जामिया के मंच पर वामपंथियों का कब्जा है, इसी कड़ी में अपना चेहरा चमकाने के लिए स्वरा भास्कर और दीपिका पादुकोण जैसे भटके हुए लोग पहुंच जाते हैं। हालांकि दीपिका पादुकोण का इसमें कोई दोष नहीं, लेकिन उन्हें वहां लेकर कौन गया, इसकी जरूर पड़ताल होनी चाहिए। आज वामपंथी विचारकों को यही डर सता रहा है कि अगर भारत हिन्दू राष्ट्र घोषित हो गया तो उनकी दाल रोटी का क्या होगा। आप एक बात की कल्पना कीजिए कि हिन्दू 100 करोड़, मुस्लिम 24 करोड़, अगर यही इबारत उल्टी कर दी जाए तो क्या ये देश धर्म निरपेक्ष हो सकता था। देश के युवाओं को गुमराह किया जा रहा है। शिक्षा संस्थानों का खुलकर दुरूपयोग किया जा रहा है। अब समय आ गया है कि देश के शिक्षा संस्थानों को गन्दी राजनीति का शिकार होने से बचाया जाए। वो समय आ गया है जब इन जयचन्दों के कारण देश नहीं झुकने देंगे की सौगन्ध को पूरा किया जाए और देश से वामपंथी विचारधारा का समूल नाश किया जाए।