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जनगणना-2021 की तैयारियो को लेकर जिला सभागार में जिला स्तरीय चार्ज व सहायक चार्ज अधिकारियों का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम
February 26, 2020 • Geeta Bisht & Dr. Naresh Kumar Choubey • political

रूद्रप्रयाग 26 फरवरी ,2020 (सू0वि0)
भारत की दशकीय जनगणना-2021 की तैयारियो को लेकर जिला सभागार में जिला स्तरीय चार्ज व सहायक चार्ज अधिकारियों का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया है। दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए प्रमुख जनगणना अधिकारी/जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि अगलीय दशकीय जनगणना देश की 16 वी और स्वन्त्रता के पश्चात 08 वी जनगणना होगी। जिलाधिकारी ने प्रशिक्षण ले रहे सभी चार्ज अधिकारियों को निर्देश दिये कि जनगणना राष्ट्रीय महत्व का कार्य है। इसके आधार पर ही किसी भी क्षेत्र विशेष की विकास योजनाएं तैयार की जाती है और इसमें छोटी सी भी त्रुटि होने से सभी चीजें प्रभावित हो जाती है इसलिए जनगणना कार्यो के लिए दिए जा रहे प्रशिक्षण को गम्भीरता से लेते हुए पूरी जिम्मेदारी के साथ जनगणना कार्यो का निर्वहन करना सुनिश्चित करें। बताया कि जनगणना-2021 का पहला चरण 01 मई से 14 जून 2020 तक चलेगा। इस दौरान मकानों की गणना और सूचीकरण का कार्य किया जाएगा। जबकि दूसरे चरण में 09 से 28 फरवरी 2021 तक प्रगणक द्वारा घर-घर जाकर प्रत्येक व्यक्ति की गणना की जाएगी।
प्रशिक्षण में जनगणना कार्यालय, देहरादून के संयुक्त निदेशक मनीष कुमार चैधरी ने कार्यशाला में बताया कि इस बार कि जनगणना पेपर मोड एवं मोबाईल एप्लीकेशन दोनों स्तर पर की जानी है, ताकि सही एवं सटीक आंकड़े एकत्रित किए जा सके। उन्होंने सभी चार्ज अधिकारियों को प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जनगणना के इतिहास एवं महत्व के बारे बताते हुए जनगणना-2021 के तहत किए जाने वाले कार्यो की विस्तार से जानकारी दी । उन्होंने कहा कि आम आदमी के लाभ हेतु विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं बनाने के लिए जमीनी स्तर की सूचनाएं जनगणना के तहत एकत्रित जानकारी के आधार पर ही की जाती है।  उन्होंने जनगणना के दौरान गुणवत्ता एवं समरूपता का विशेष ध्यान रखने को कहा ताकि ये आंकडे भविष्य में योजनाएं बनाने में सहायक सिद्व हो सके।
विदित हो कि भारत में दशकीय जनगणना 1872 से निर्बाध रूप से होती आ रही है। यह दशकीय जनगणना देश की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद 8वीं जनगणना होगी। जनगणना देश, राज्य, जिला, शहर, वार्ड और ग्राम स्तर पर प्राथमिक आंकडों का सबसे बडा स्रोत है। भारत की जनगणना का मकान की स्थिति, सुविधाओं एवं परिसंपत्तियों, जन सांख्यिकीय, धर्म, अनुसूचित जाति, जनजाति, भाषा, साक्षरता, शिक्षा, आर्थिक गतिविधि, प्रवसन एवं प्रजननता सहित विभिन्न मानकों से संबधित आधारभूत आंकड़े उपलब्ध कराने का 150 वर्षो का स्वर्णिम इतिहास रहा है। जनगणना में संकलित किए गए आंकड़े बहुत ही महत्वपूर्ण होते है, क्योंकि ये देश की योजना एवं विकास के लिए ठोस आधार उपलब्ध कराते है। प्रशिक्षण कार्यशाला में  एडीएम अरविंद पांडेय, एस डी एम ऊखीमठ वरुण अग्रवाल, तहसीलदार जयवीर बधानी, शालिनी मौर्य, श्रेष्ठ गुनसोला, किशनगिरी गोस्वामी सहित सभी नगर पालिका व नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारी, सहायक चार्ज अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।