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दिल्ली हिंसा के तार घुसपैठिये मुसलमानों से जुड़े
February 28, 2020 • Geeta Bisht & Dr. Naresh Kumar Choubey • crime

दिल्ली।  दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पहले धरना-प्रदर्शन और उसके बाद हिंसा-आगजनी में 30 से अधिक लोगों की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दंगा सुनियोजित था,यह बात आईने की तरफ साफ हो गई है। दंगे के पीछे के साजिशकर्ताओं का पता लगाने के लिए दिल्ली पुलिस और खुफिया तंत्र हर एंगिल से दंगे की जांच कर रही हैै। आम आदमी पार्टी की तरफ से आरोप लगाया जा रहा है कि यूपी से आए लोगों ने दंगा भड़काया तो चर्चा इस बात की शुरू हो गई कि दिल्ली दंगा का यूपी कनेक्शन क्या है ? इसी चर्चा में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए,जिसके आधार पर ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जिस तरह से घुसपैठियों के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है,उससे भयभीत रोहिंग्या मुसलमान यूपी से पलायन करके दिल्ली,मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल,झारखंड आदि राज्यों में शिफ्ट होने लगे हैं, यह वह राज्य हैं जहां गैर भाजपा सरकारें है और जो सीएए का विरोध कर रही हैं।     

सूत्र बताते हैं कि दिल्ली के दंगे रोहिंग्या मुसलमानों और उनको राजनैतिक संरक्षण में देने वाले नेताओं के ‘गठजोड़’ की देन थे। दिल्ली में रोहिंग्या मुसलमानों के बल पर ही दिल्ली में दो दिन तक आगजनी-लूटपाट और हत्याओं का तांडव चला जिसे कुछ स्थानीय अराजक तत्वों और सड़क छाप नेताओं ने तन-मन-धन के साथ पूरा समर्थन दिया।  दिल्ली में रोहणिया मुलसमानों की घुसपैठ सिर्फ यूपी से ही नहीं हुई है। म्यमांर से भाग कर भारत की सीमाओं में चोरी-छिपे घुसने वाले मुसलमानों ने सबसे पहले पश्चिम बंगाल को अपना ठिकाना बनाया तो जम्मू-कश्मीर(धारा 370 हटने से पूर्व) भी रोहिंग्या को खूब रास आया,लेकिन मोदी सरकार ने कश्मीर से धारा 370 हटाकर जम्मू-कश्मीर  को केन्द्र शासित राज्य घोषित कर दिया तो रोहिंग्या के लिए वहां रहना मुश्किल हो गया,क्योंकि वहां चप्पे-चप्पे पर तैनात सेना पूरी मुस्तैदी के साथ रोहिंग्या के पीछे पड़ी थी। इसी के चलते यहां से भी रोहिंग्या मुसलमान भाग कर दिल्ली आ गए। इसी के चलते दिल्ली में रोहिंग्या मुसलमानों की  आबादी में काफी तेजी से इजाफा हुआ। 
 
 
इसमें से कई ने तो वोटर कार्ड और आधार तक बना लिए हैं और विधान सभा चुनाव में वोटिंग तक की थी। यह रोहिंग्या उत्तर पूर्वी दिल्ली में मुस्लिम बाहुल्य इलाकों के आसपास डेरा जमाए हुए हैं। इसी इलाके में हिंसा भी हुई थी,जिस तरह से हिंसा में हजारों राउडं गोलिया चली थीं,उसने पुलिस को चौंका दिया था। रोहिंग्या मुसलमानों ने अराजकता जरूर फैलाई जरूर लेकिन इन्हें खाद-पानी राहुल गांधी,प्रियंका गांधी, ओवैसी, कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, वारिस पठान, शरजील इमाम, स्वरा भाष्कर,चन्द्रशेखर रावण जैसे नेतााओं ने मुहैया कराई। इन्होंने हिन्दू-मुलसमानों के बीच खाई चौड़ी करने का कोई मौका नहीं छोड़ा।    गौरतलब हो,हाल ही में भारतीय खुफिया एजेंसियों ने सेना और अर्ध सैनिक बलों को रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर अलर्ट किया था। खुफिया सूत्रों का कहना था कि भारत के कुछ खास हिस्सों में हमले के लिए पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई करीब 200 रोहिंग्या मुसलमानों कोबांग्लादेश में ट्रेनिंग दे रही है। इसमें बांग्लादेशी आंतकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन (जेएमबी) आईएसआई की मदद कर रहा है।