ALL political social Entertainment health tourism crime religious Sports National Other State
देश को आग लगाने वाले दंगाई क्या नागरिकता पाने के हकदार हैं ?
February 26, 2020 • Geeta Bisht & Dr. Naresh Kumar Choubey • political

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर शुरू हुआ बवाल उत्तर पूर्वी दिल्ली में अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। भारत विरोधी तत्व एकाएक हावी होते जा रहे हैं जिस तरह पुलिस के माथे पर पिस्तौल तान दी जा रही है, जिस तरह घरों से लोग पथराव और गोलीबारी कर रहे हैं, पेट्रोल भरी बोतलें फेंकने की खबरें आ रही हैं वह दर्शाती है कि एक खतरनाक साजिश के तहत भारत और भारत की सरकार को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। नागरिकता संशोधन कानून किसी भारतीय पर लागू ही नहीं होता, एनआरसी सरकार ला ही नहीं रही है लेकिन कुछ लोग बेवजह मुस्लिमों को बहका कर देश को आग में झोंकने का प्रयास कर रहे हैं।
 
देश के विभिन्न राज्यों में सबसे शांत मानी जानी वाली राजधानी दिल्ली के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के कुछ इलाकों में उपद्रवियों ने सोमवार को जमकर हिंसा की थी और अब मंगलवार को भी मौजपुर और ब्रह्मपुरी इलाके में पत्थरबाजी की खबर है। दिल्ली में हुई हिंसा में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल भी शामिल हैं। साथ ही 100 से ज्यादा हिंसा में घायल बताये जा रहे हैं। देखा जाये तो मंगलवार सुबह भी हालात तनावपूर्ण दिखे क्योंकि सुबह-सुबह पांच मोटरसाइकिलों को आग के हवाले कर दिया गया। तनावगस्त क्षेत्रों में बड़ी तादाद में पुलिस बल तैनात है। सोमवार देर रात से सुबह तक मौजपुर और उसके आस-पास इलाकों में आगजनी के 45 कॉल आए, जिसमें दमकल की एक गाड़ी पर पथराव किया गया, जबकि एक दमकल की गाड़ी को आग के हवाले कर दिया गया जिसमें तीन दमकलकर्मी घायल हुए हैं। ऐसी भी खबर है कि दिल्ली के भजनपुरा इलाके के नॉर्थ घोंडा कब्रिस्तान के पास आज सुबह फायरिंग हुई। इस फायरिंग में एक नाबालिग के हाथ में गोली लगी है। घायल को पास के जग प्रवेश अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने पूरे उत्तर पूर्वी जिले में 1 महीने के लिए धारा 144 लगा दी है। हिंसा की यह सब घटनाएं दर्शाती हैं कि दिल्ली की शांति में खलल डाल कर कुछ लोग अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाह रहे हैं।
 
 
दिल्ली में हुई हिंसा पर गृह मंत्रालय ने एक आपात बैठक कर हालात की समीक्षा की। गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपराज्यपाल अनिल बैजल, पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक समेत कई अफसर मौजूद रहे। गृहमंत्री के साथ बैठक से ठीक पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अधिकारियों की एक आपात बैठक बुलाई। इस बैठक के बाद केजरीवाल ने कहा कि पुलिस को ऊपर से कार्रवाई का आदेश नहीं है, इसलिए वह उचित कार्रवाई नहीं कर पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमाई इलाकों से लोग दिल्ली आ रहे हैं और हिंसा कर रहे हैं। हमने बॉर्डर को सील करने और उपद्रवियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
 
 
बहरहाल, देखा जाये तो दिल्ली हिंसा पर एक चीज साफ नजर आ रही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के दौरान जानबूझकर यह हिंसा भड़काई गयी ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीएए के विरोध का मामला उठे लेकिन यह उपद्रवी भूल गये हैं कि मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठे या नहीं उठे, सीएए कानून बन चुका है और इसे बरकरार रखने, इसमें संशोधन करने या इसे रद्द करने का पूरा अधिकार भारत के पास है। यह जो लोग हिंसा भड़का रहे हैं उन्हें इस बात का भान होना ही चाहिए कि यदि यह लोग देश के कानून का सम्मान नहीं कर सकते और तोड़फोड़, आगजनी और सुरक्षाबलों पर पथराव कर अपने अधिकारों की तथाकथित लड़ाई लड़ना चाहते हैं तो ऐसे लोगों से कानून कड़ाई से निबटेगा। यहाँ सवाल यह भी उठता है कि देश में सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को आग के हवाले कर देने वाले दंगाइयों को क्या देश के नागरिकों के लिए उल्लिखित कर्तव्यों का जरा भी भान नहीं है? क्या ऐसे लोग नागरिकता पाने के हकदार हैं?
डॉ. नरेश कुमार चौबे।