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आखिर 15 अगस्त 1947 की आधी रात को ही क्यों मिली थी आजादी, कैसा था पहला स्वतंत्रता दिवस ?
August 14, 2020 • Geeta Bisht & Dr. Naresh Kumar Choubey • social

15 अगस्त 1947 का दिन हर भारतीय के लिए एक नए जीवन के समान था... इस दिन की कीमत अपने आप में बहुत ज्यादा थी। हजारों लोगों की कुर्बानियों के बाद भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी। तो चलिए हम आपको आजादी की उस रात के बारे में कुछ रोचक जानकारियां देते हैं। 

 

15 अगस्त को ही क्यों मिली थी आजादी ?

साल 1945 में दूसरे विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद ब्रिटेन में चुनाव हुए। जहां पर लेबर पार्टी ने जीत हासिल की और अपने चुनावी वादे को भी निभाया। लेबर पार्टी ने कहा था कि अगर उनकी सरकार बनती है तो ब्रितानी उपनिवेशवाद को समाप्त कर दिया जाएगा। जिसका मतलब था भारत सहित कई गुलाम मुल्कों को आजाद कर दिया जाएगा।

इसके लिए फरवरी 1947 में लॉर्ड माउंटबेटन की नियुक्ति हुई लेकिन फिर माउंटबेटन ने जून 1948 में आजादी देने की बात कही। इसके लिए बकायदा एक प्रस्ताव दिया। जिसका जमकर विरोध हुआ। जिसके बाद माउंटबेटन को एक साल पहले 1947 में आजादी देनी पड़ी।

लॉर्ड माउंटबेटन की योजना के तहत 15 अगस्त 1947 को आजादी का ऐलान करने का दिन तय किया गया क्योंकि इसी दिन 1945 में जापान ने आत्मसमर्पण किया था। लॉर्ड माउंटबेटन ने खुद इसके पीछे का तथ्य भी दिया था कि आखिर उन्होंने 15 अगस्त का दिन ही क्यों चुना था।

आजादी के जश्न के लिए 15 अगस्त की तारीख तय हो गई मगर ज्योतिषियों ने इसका जमकर विरोध किया क्योंकि ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह दिन अशुभ और अमंगलकारी था। ऐसे में दूसरी तारीखों का चुनाव किया जाने लगा मगर लॉर्ड माउंटबेटन 15 अगस्त की तारीख को नहीं बदलना चाहते थे।

ऐसे में ज्योतिषियों बीच का रास्ता निकलते हुए 14-15 तारीख की मध्य रात्रि का समय तय किया। क्योंकि अंग्रेजी समयनुसार 12 बजे के बाद अगला दिन लग जाता है। जबकि भारतीय मान्यता के मुताबिक सूर्योदय के बाहर अगला दिन माना जाता है। ऐसे में आजादी के जश्न के लिए अभिजीत मुहूर्त को चुना गया जो 11 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 39 मिनट तक रहने वाला था और इसी बीच पंडित जवाहरलाल नेहरू को अपना भाषण भी समाप्त करना था।

15 अगस्त की आधी रात को पंडित नेहरू ने आजादी का ऐतिहासिक भाषण 'ट्रिस्ट विद डेस्टनी' दिया था। पंडित नेहरू ने यह भाषण वायसराज लॉज जो मौजूदा राष्ट्रपति भवन है वहां से दिया था। उस वक्त पंडित नेहरू प्रधानमंत्री नहीं बने थे। 

15 अगस्त के दिन लॉर्ड माउंटबेटन अपने ऑफिस में काम किया। दोपहर में पंडित नेहरू ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल की सूची सौंपी थी और बाद में इंडिया गेट के पास प्रिसेंज गार्डेन में एक सभा को संबोधित किया था।

महात्मा गांधी नहीं थे मौजूद

जब राजधानी दिल्ली में आजादी का जश्न मनाया जा रहा था उस वक्त महात्मा गांधी दिल्ली से हजारों किमी दूर पश्चिम बंगाल के नोआखली में थे और राज्य में शांति कायम करने का प्रयास कर रहे थे। जानकार बताते हैं कि पंडित नेहरू के ऐतिहासिक भाषण को पूरे देश ने सुना था मगर गांधी जी नहीं सुन पाए थे।

पंडित नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल ने महात्मा गांधी को पत्र लिखकर बताया था कि 15 अगस्त को देश का पहला स्वाधीनता दिवस मनाया जाएगा। आप राष्ट्रपिता हैं। इसमें शामिल होकर अपना आशीर्वाद दें। जिसके बाद महात्मा गांधी ने भी जवाब में पत्र लिखते हुए कहा था कि जब बंगाल में हिन्दू-मुस्लिम एक दूसरे की जान ले रहे हैं, ऐसे में मैं जश्न मनाने के लिए कैसे आ सकता हूं। मैं दंगा रोकने के लिए अपनी जान दे दूंगा।

16 अगस्त को लाल किले में फहराया गया था झंडा

हर साल प्रधानमंत्री स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से झंडा फहराते हैं लेकिन 15 अगस्त 1947 के दिन झंडा नहीं फहराया गया था। लोकसभा सचिवालय के एक शोध पत्र के मुताबिक, पंडित नेहरू ने 16 अगस्त 1947 को लाल किले से झंडा फहराया था।

इतना ही नहीं 15 अगस्त को भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा रेखा का निर्धारण भी नहीं हुआ था। इसका फैसला 17 अगस्त को रेडक्लिफ लाइन की घोषणा से हुआ था। देश भले ही 1947 को आजाद हो गया हो लेकिन हिन्दुस्तान के पास अपना खुद का राष्ट्रगान नहीं था। हालांकि, रवींद्रनाथ टैगोर ने 1911 में ही जन गण मन को लिख दिया था मगर 1950 में वह राष्ट्रगान बन पाया था।